DBMS में हायरार्किकल मॉडल (Hierarchical Model in DBMS)

Nageshwar Das
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हायरार्किकल मॉडल इन DBMS: पेरेंट-चाइल्ड संबंधों पर आधारित डेटाबेस डिज़ाइन


प्रस्तावना

हायरार्किकल मॉडल (Hierarchical Model) डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (DBMS) का सबसे पुराना डेटा मॉडल है, जिसे 1960 के दशक में IBM द्वारा विकसित किया गया। यह मॉडल डेटा को पेरेंट-चाइल्ड रिलेशनशिप (Parent-Child Relationship) के रूप में व्यवस्थित करता है, जो एक पेड़ (Tree) की संरचना जैसा होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बैंकिंग, टेलीकॉम, और लेन-देन प्रसंस्करण (Transaction Processing) में किया जाता था।


हायरार्किकल मॉडल की परिभाषा

इस मॉडल में डेटा को रूट (Root)पेरेंट (Parent), और चाइल्ड (Child) नोड्स के रूप में व्यवस्थित किया जाता है। प्रत्येक पेरेंट नोड के कई चाइल्ड नोड हो सकते हैं, लेकिन प्रत्येक चाइल्ड का केवल एक ही पेरेंट होता है। यह संबंध एक-से-अनेक (One-to-Many) का होता है।


हायरार्किकल मॉडल की संरचना (डायग्राम)

        [कंपनी (रूट)]  
           /     \  
          /       \  
  [विभाग A]      [विभाग B]  
     /  |  \          |  
    /   |   \         |  
[कर्मचारी1][कर्मचारी2][कर्मचारी3]  [कर्मचारी4]  

व्याख्या:

  • रूट नोड: "कंपनी" सबसे ऊपरी नोड है।
  • पेरेंट नोड: "विभाग A" और "विभाग B"।
  • चाइल्ड नोड: "कर्मचारी1", "कर्मचारी2", आदि।

हायरार्किकल मॉडल की विशेषताएँ

  1. ट्री स्ट्रक्चर: डेटा का पदानुक्रमित (Hierarchical) प्रतिनिधित्व।
  2. पॉइंटर्स का उपयोग: पेरेंट और चाइल्ड नोड्स को फिजिकल पॉइंटर्स से जोड़ा जाता है।
  3. एक-से-अनेक संबंध: एक पेरेंट के कई चाइल्ड, लेकिन एक चाइल्ड का एक ही पेरेंट।
  4. रिजिड स्ट्रक्चर: संबंध बदलने के लिए पूरी संरचना को एडिट करना पड़ता है।

हायरार्किकल मॉडल के घटक

  • सेगमेंट (Segment): डेटा की इकाई (जैसे—कंपनी, विभाग, कर्मचारी)।
  • फील्ड (Field): सेगमेंट का गुण (जैसे—कर्मचारी का नाम, आईडी)।
  • पॉइंटर्स: पेरेंट और चाइल्ड नोड्स के बीच लिंक स्थापित करते हैं।

हायरार्किकल मॉडल के लाभ

  1. तेज डेटा एक्सेस: पॉइंटर्स के कारण डेटा तेजी से रिट्रीव होता है।
  2. सरल डिज़ाइन: पेड़ संरचना समझने और लागू करने में आसान।
  3. डेटा अखंडता: पेरेंट-चाइल्ड संबंधों से डेटा स्थिरता बनी रहती है।
  4. उच्च प्रदर्शन: बड़े लेन-देन (Transactions) के लिए उपयुक्त, जैसे—बैंकिंग सिस्टम।

सीमाएँ और चुनौतियाँ

  1. जटिल क्वेरीज़: मल्टी-लेवल संबंधों को हैंडल करना मुश्किल।
  2. डेटा रिडंडेंसी: एक ही डेटा कई जगह स्टोर हो सकता है।
  3. लचीलेपन की कमी: मैनी-टू-मैनी (Many-to-Many) संबंधों को सपोर्ट नहीं।
  4. संशोधन की कठिनाई: संरचना बदलने पर सभी पॉइंटर्स अपडेट करने पड़ते हैं।

वास्तविक दुनिया के उदाहरण

  1. IBM का IMS (Information Management System): 1968 में लॉन्च, आज भी बैंकिंग में उपयोग।
  2. XML डेटा स्टोरेज: XML फाइल्स में पेड़ संरचना का उपयोग।
  3. फाइल सिस्टम: कंप्यूटर की डायरेक्टरी स्ट्रक्चर (फोल्डर्स और सबफोल्डर्स)।

हायरार्किकल vs रिलेशनल मॉडल

पैमानाहायरार्किकल मॉडलरिलेशनल मॉडल
संबंध प्रकारएक-से-अनेकएक-से-एक, अनेक-से-अनेक
डेटा संरचनापेड़ (Tree)टेबल्स (Rows और Columns)
लचीलापननिम्नउच्च
उदाहरणIBM IMSMySQL, Oracle

हायरार्किकल मॉडल का भविष्य

  • लेगेसी सिस्टम्स: पुराने बैंकिंग और टेलीकॉम सिस्टम में अभी भी उपयोग।
  • डॉक्यूमेंट डेटाबेस: MongoDB जैसे NoSQL डेटाबेस में पेड़ संरचना का प्रभाव।
  • IoT डेटा: हायरार्किकल डेटा (जैसे—सेंसर नेटवर्क) को मैनेज करने में उपयोगी।

निष्कर्ष

हायरार्किकल मॉडल ने डेटाबेस प्रबंधन की नींव रखी, लेकिन इसकी कठोर संरचना और सीमाओं के कारण इसे रिलेशनल और नॉन-रिलेशनल मॉडल्स ने पीछे छोड़ दिया। फिर भी, यह मॉडल आज भी विशिष्ट उपयोगों (जैसे—लेन-देन प्रसंस्करण) में प्रासंगिक है। डेटा की बढ़ती जटिलताओं के साथ, हायरार्किकल सिद्धांत नए डेटाबेस टेक्नोलॉजीज को प्रेरित कर रहे हैं।

DBMS में हायरार्किकल मॉडल (Hierarchical Model in DBMS)
DBMS में हायरार्किकल मॉडल (Hierarchical Model in DBMS)



स्रोत: यह लेख IBM IMS डॉक्यूमेंटेशन, डेटाबेस सिद्धांतों की पुस्तकों, और ऐतिहासिक केस स्टडीज़ पर आधारित है। तुलनात्मक विश्लेषण के लिए रिलेशनल मॉडल के साथ तुलना की गई है।

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