कंप्यूटर नेटवर्क में सॉनेट (SONET in Computer Networks)

Nageshwar Das
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SONET (सिंक्रोनस ऑप्टिकल नेटवर्क): ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्किंग की रीढ़


प्रस्तावना

कंप्यूटर नेटवर्क में सॉनेट (SONET in Computer Networks) SONET (सिंक्रोनस ऑप्टिकल नेटवर्क) ऑप्टिकल फाइबर पर उच्च-गति डेटा ट्रांसमिशन के लिए एक मानक प्रोटोकॉल है, जिसे 1980 के दशक में अमेरिकन नेशनल स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूट (ANSI) द्वारा विकसित किया गया। यह टेलीकॉम नेटवर्क में ध्वनि, वीडियो, और डेटा को सुरक्षित व सिंक्रोनस तरीके से ट्रांसफर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। SONET की मदद से नेटवर्क ऑपरेटर्स गीगाबिट्स प्रति सेकंड की स्पीड से डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं, जो इसे आधुनिक ब्रॉडबैंड और 5G नेटवर्क्स का आधार बनाता है।


SONET की मुख्य विशेषताएँ

  1. सिंक्रोनस ट्रांसमिशन: सभी डिवाइस एक कॉमन क्लॉक सिग्नल के साथ सिंक्रोनाइज़ होते हैं।
  2. स्केलेबिलिटी: OC-1 (51.84 Mbps) से OC-768 (40 Gbps) तक की स्पीड सपोर्ट।
  3. सेल्फ-हीलिंग रिंग्स: नेटवर्क फॉल्ट होने पर स्वचालित रूप से बैकअप पाथ एक्टिवेट होता है।
  4. मल्टीप्लेक्सिंग: विभिन्न प्रकार के डेटा (वॉइस, वीडियो) को एक साथ ट्रांसफर करना।

SONET का आर्किटेक्चर

SONET रिंग डिज़ाइन

        [नोड A] ----- [नोड B]  
          |               |  
          |               |  
        [नोड D] ----- [नोड C]  
  • बाईडायरेक्शनल रिंग: डेटा दो दिशाओं (clockwise और counter-clockwise) में फ्लो करता है।
  • प्राइमरी और सेकेंडरी पाथ: फाइबर के टूटने पर डेटा दूसरे पाथ से रूट होता है।

SONET की परतें (Layers)

  1. पाथ लेयर: एंड-टू-एंड कनेक्शन प्रबंधित करती है (जैसे—एक शहर से दूसरे शहर तक)।
  2. लाइन लेयर: मल्टीप्लेक्सिंग और डेटा फ्रेमिंग की जिम्मेदारी।
  3. सेक्शन लेयर: फिजिकल मीडियम (ऑप्टिकल फाइबर) पर डेटा ट्रांसमिशन नियंत्रित करती है।

SONET फ्रेम संरचना

  • STS-1 (Synchronous Transport Signal): 810 बाइट्स का बेसिक फ्रेम, जो 9 पंक्तियों × 90 कॉलम में बँटा होता है।
  • ओवरहेड और पेलोड:
    • ट्रांसपोर्ट ओवरहेड (3 कॉलम): नेटवर्क मैनेजमेंट और एरर डिटेक्शन के लिए।
    • SPE (Synchronous Payload Envelope): यूजर डेटा (वॉइस, वीडियो) को स्टोर करता है।

SONET के लाभ

  • उच्च विश्वसनीयता: सेल्फ-हीलिंग रिंग्स नेटवर्क डाउनटाइम को कम करते हैं।
  • लचीलापन: विभिन्न नेटवर्क प्रोटोकॉल्स (ATM, IP) के साथ संगत।
  • एफिशिएंट बैंडविड्थ यूटिलाइजेशन: TDM तकनीक से डेटा पैकेट्स को शेयर करना।
  • लंबी दूरी: ऑप्टिकल फाइबर के कारण बिना सिग्नल लॉस के 100+ किमी तक ट्रांसमिशन।

सीमाएँ और चुनौतियाँ

  1. उच्च लागत: ऑप्टिकल स्विच और ट्रांसीवर्स महँगे होते हैं।
  2. कॉम्प्लेक्स मैनेजमेंट: नेटवर्क कॉन्फ़िगरेशन और मॉनिटरिंग जटिल।
  3. लचीलेपन की कमी: पैकेट-स्विच्ड नेटवर्क्स (जैसे—इथरनेट) की तुलना में कम फ्लेक्सिबल।

वास्तविक दुनिया में SONET के उदाहरण

  1. टेलीकॉम बैकबोन नेटवर्क: Airtel, Jio द्वारा शहरों को जोड़ने के लिए उपयोग।
  2. इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट्स (IXPs): डेटा सेंटर्स के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी।
  3. आपदा प्रबंधन: सेल्फ-हीलिंग क्षमता के कारण आपातकालीन संचार में उपयोग।

SONET vs SDH: अंतर

पैमानाSONETSDH (सिंक्रोनस डिजिटल हायरार्की)
मानकANSI (अमेरिका)ITU-T (अंतरराष्ट्रीय)
बेसिक रेटSTS-1 (51.84 Mbps)STM-1 (155.52 Mbps)
उपयोग क्षेत्रउत्तरी अमेरिकायूरोप, एशिया, अफ्रीका

SONET का भविष्य

  • OTN (ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क): SONET के सिद्धांतों पर आधारित अधिक उन्नत प्रोटोकॉल।
  • डीएमएलएस (DWDM): एक ही फाइबर में कई वेवलेंथ्स का उपयोग कर क्षमता बढ़ाना।
  • 5G रोलआउट: मोबाइल टावर्स को SONET बैकबोन से जोड़कर हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देना।

निष्कर्ष

SONET ने ऑप्टिकल नेटवर्किंग में क्रांति लाकर दुनिया को गीगाबिट-स्पीड इंटरनेट दिया है। हालाँकि नए प्रोटोकॉल्स (जैसे—OTN, MPLS) इसकी जगह ले रहे हैं, फिर भी SONET की विश्वसनीयता और सिंक्रोनस डिज़ाइन आज भी टेलीकॉम उद्योग की नींव है। भविष्य में, यह तकनीक 5G, क्लाउड कंप्यूटिंग, और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कंप्यूटर नेटवर्क में सॉनेट (SONET in Computer Networks)
कंप्यूटर नेटवर्क में सॉनेट (SONET in Computer Networks)



स्रोत: यह लेख ANSI/ITU-T दस्तावेज़ों, ऑप्टिकल नेटवर्किंग पुस्तकों, और टेलीकॉम इंडस्ट्री केस स्टडीज़ पर आधारित है। तकनीकी विवरणों को सरल हिंदी में समझाने के लिए उदाहरणों और डायग्राम्स का सहारा लिया गया है।

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